मुलाक़ात
Sunday, 18 July 2021
Tuesday, 6 July 2021
Saturday, 3 July 2021
Thursday, 1 July 2021
Saturday, 21 January 2017
सर
डोनाल्ड ब्रैडमैन का उनके 90 वें जन्मदिन पर आस्ट्रेलियन टीवी पत्रकार रे.मार्टिन
द्वारा लिया गया एक दुर्लभ साक्षात्कार
चयन,अनुवाद एवं प्रस्तुति –लोकमित्र गौतम
मेरे देखे क्रिकेटरों में सर गैरी सोबर्स सर्वश्रेष्ठ हैं
-सर डोनाल्ड ब्रैडमैन
सर
डोनाल्ड ब्रैडमैन का परिचय लिखना सचमुच गुस्ताखी करने जैसा है. भला दुनिया में कौन
ऐसा इंसान होगा जिसकी क्रिकेट में जरा भी रुचि हो और वह ब्रैडमैन को न जानता हो.बीसवीं
सदी के क्रिकेट इतिहास में ही नहीं, अब
तक के समूचे क्रिकेट इतिहास में वह एक धूमकेतु की तरह चमकने वाले सितारे हैं.जब तक
दुनिया है और दुनिया में क्रिकेट है,तब तक सर डोनाल्ड ब्रैडमैन ऐसे ही अपनी चमक
बिखेरेंग. दुनियाभर में तमाम क्रिकेटर आयेंगे, जाएंगे,रिकॉर्ड
बनेंगे, रिकॉर्ड टूटेंगे.मगर सर डोनाल्ड ब्रैडमैन की
टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाजी का जो औसत है (99.99) वह शायद ही कभी टूटे.
हालाँकि बल्लेबाजी में आतिशी मुखरता के लिए
जाने जाने वाले ब्रैडमैन व्यक्तिगत जीवन में बहुत चुप्पे व्यक्ति थे. दशकों तक
उन्होंने किसी भी पत्रकार को कोई इंटरव्यू नहीं दिया था. यहाँ प्रस्तुत यह विरला
इंटरव्यू उनसे 1998 में आस्ट्रेलियन टीवी पत्रकार रे मार्टिन ने लिया था.यह
इंटरव्यू सर ब्रैडमैन के 90वें जन्मदिन पर आस्ट्रेलियन टीवी पर प्रसारित हुआ था.
रे
मार्टिन: सर डोनाल्ड धन्यवाद कि आपने मुझे समय दिया...धन्यवाद कि आप मुझसे बात कर
रहे हैं.
ब्रैडमैन:
मुझे खुशी है.
रे
मा.: सालों के पत्रकारीय जीवन में मैंने तमाम राजकुमारों, राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों के साक्षात्कार किए
हैं...पर आज न जाने क्यों नर्वस हो रहा हूं?
ब्रैडमैन:
नहीं तो.....उल्टे यह तो मैं हूं जो नर्वस हूँ...आप नहीं.
रे
मा: मैंने जब लोगों को बताया कि मैं आपका इंटरव्यू करने जा रहा हूं तो लोगों की
प्रतिक्रिया थी, बहुत अच्छा बाकी आपकी किस्मत. क्या आप
आज भी यह महसूस करते हैं कि लोग आपका सम्मान नहीं करते, मगर वे आपसे बेइंतहा प्यार करते हैं.
ब्रैडमैन:
न..न..ऐसा कतई नहीं है.मैं एक साधारण आदमी हूं.
रे
मा.:क्या आपने इसी वजह से लम्बे समय से किसी से बात नहीं की ?
ब्रैडमैन:
मैंने तमाम लोगों से बातें की है; लेकिन
सार्वजनिक तौरपर नहीं. मैं प्रचार को नापसंद करता हूं. चाहे
वह किसी भी प्रकार का क्यों न हो. मैं जैसे-जेसे बूढ़ा होता जा रहा हूं, इसके प्रति मेरी अरुचि और भी बढ़ गयी है.
रे
मा.: दरअसल यह भी मजेदार बात है; क्योंकि
आप अपनी पीढ़ी के आस्ट्रेलियाइयों में सबसे ज्यादा प्रचार पाये हैं?
ब्रैडमैन:
शायद ऐसा है. लेकिन यह सब इस वजह से नहीं कि ऐसा मैं चाहता था...मेरे साथ ऐसा
इसलिए है क्योंकि इसे रोक सकने में, मैं
असमर्थ था.
रे
मा.: प्रशंसकों की चिट्ठियों के बारे में कुछ बताइये, आज भी कितने खत प्रतिदिन आपके पास आते
हैं?
ब्रैडमैन:
वाकई (रुक कर) शायद, मेरे पास जितने खत आजकल आते हैं, उतने पहले कभी नहीं आये, सिवाय 1948 के इंग्लैंड दौरे के समय के. मेरे प्रतिदिन
औसतम 4 घंटे प्रशंसकों के जवाब देने में गुजर जाते हैं.
रे
मा.: क्या आपके प्रशंसकों के ये पत्र पूरी दुनिया से आते हैं?
ब्रैडमैन:
हां, पूरी दुनिया से. मगर निस्संदेह सबसे ज्यादा
आस्ट्रेलिया से ही आते हैं.लेकिन भारत और इंग्लैंड से भी मुझे काफी बड़ी संख्या में
पत्र मिलते हैं.
रे
मा.: सबसे बेहतरीन पत्र जो आपको मिला हो?
ब्रैडमैन:
(थोड़ा रुककर) अरे, हां। एक छोटे से बच्चे ने मुझे लिखा, ”मुझे अफसोस है कि मैं बहुत लम्बे समय
में आपको पत्र लिखने का निर्णय ले पाया. मगर मुझे हमेशा इसका अफसोस रहेगा अगर यह
सचमुच बहुत लेट हो गया।“ इस पर मैंने उसे जवाब देते हुए कहा, ”अरे, यह तो उसका आधी भी नहीं है, जितनी
देर मैं करूंगा“ (हंसते हैं) एक और पत्र एंड्रयू नाम के
लड़के ने डर्बिन से लिखा,
”मैं आपको बहुत
लंबे अरसे से पत्र लिखना चाहता था लेकिन मेरे दादा ने बताया कि आप तो मर चुके हैं, पर अभी हाल ही में मेरे पिताजी ने कहा
कि आप जीवित हैं...अतः मैं आपको सच्चाई जानने के लिए लिख रहा हूं.“
रे
मा.: (हंसते हुए) और आपने फिर उसे बताया?
ब्रैडमैन:
मैंने उसे लिखा और सच्चाइ्र बतायी. एक दिन एक और पत्र आया. यह जैक नाम के एक लड़के
का था। इसमें उसने लिखा,
”मैं चार साल का
हूं। मैं आपको पत्र अपने भाई टॉम की मदद
से लिख रहा हूं जो कि दस साल का है (हंसते हुए).“
रे
मा.: आपके ज्यादातर प्रशंसक आपसे क्या मांगते हैं...हस्ताक्षर, सलाह?
ब्रैडमैन:
ज्यादातर दस्तखत. कभी-कभी सलाह भी मांगते हैं, मगर
आमतौर पर दस्तखत ही.
रे
मा.: क्रिकेट में क्या चीज आपको कमजोर बनाती रही है ?
ब्रैडमैन:
निस्संदेह शतक बनाने के करीब होना.
रे
मा.: पर जब आप 48 की यात्रा पर थे तब तो एक दिन में 600 से ज्यादा रन हासिल किए थे.
ब्रैडमैन:
हां, इंग्लैंड में हमने एक दिन में 600 से
ज्यादा रन बनाये हैं.लेकिन इसमें समूची टीम लगी थी. हम जानते थे कि लोग मुझे पत्र लिखेंगे
और पूरी टीम के दस्तखत चाहेंगे. इसलिए हम लोगों ने 5000 कागजों में दस्तखत करके रख
लिये हैं, जो भी पत्र लिखकर पूरी टीम के दस्तखत
चाहता है उसे एक सप्ताह के अंदर ये मुहैय्या करा दिये जाते हैं.
रे
मा.: ठीक है, लेकिन आप ऐसा क्यों सोचते हैं कि वहां
डान ब्रैडमैन..और अन्य खिलाड़ी थे..आखिर ऐसा विभेद क्यों ?
ब्रैडमैन:
दरअसल उस दौर में जो अन्य खिलाड़ी थे मैं समझता हूं वे गुप्त रूप से कहीं ज्यादा
प्रभावशाली थे. मुझे याद है मैं नेविले कार्ड्स से बात कर रहा था उसने मुझसे कहा, ”मैं निचले क्रम में आऊंगा क्योंकि मैं
तुम्हें शतक बनाते देखना चाहता हूं.“ मैंने
कहा, ”नेविले हमारी टीम में एक छोटा सा लड़का
है. उसका नाम रे राविंसन है (जो न्यू साउथवेल्स से था और आस्ट्रेलिया के लिए बहुत
थोड़ी क्रिकेट ही खेली) अगर तुम उसको शतक बनाते देख लोगे, तो फिर मुझे कभी नहीं देखना चाहोगे.
मगर बदकिस्मती से वह बहुत अच्छा नहीं कर सका. लेकिन क्यों नहीं कर सका? यह मेरी समझ में कभी नहीं आया.“
रे
मा.: स्टैन मैकबे प्रकरण क्या था, क्या
यह सच है कि इंग्लैंड में उसके द्वारा एक प्रभावशाली शतक जमाने पर पूरे समय आप
बालकनी से हाथ हिला रहे थे?
ब्रैडमैन:
हां, यह सन 1938 में नाटिंघम में हुआ था.
निस्संदेह मैंने अपने पूरे जीवन में किसी को उससे बढ़िया पारी खेलते नहीं देखा.
हमारी टीम की यह पहली पारी थी और हम लोग इंग्लैंड से काफी पीछे थे. क्योंकि
इंग्लैंड ने पहली पारी में विशाल स्कोर खड़ा किया था. खैर, एक विकेट गिरना शेष था जो कि फ्लीटवुड
स्मिथ का था. स्टैन मैकबे फ्लीटवुड के साथ बैटिंग कर रहा था. उन दोनों ने अंतिम
विकेट के लिए 20 मिनट में 77 रन जोड़े थे. इंग्लैंड के कप्तान ने पांच खिलाड़ियों को
स्टैन के चौकों-छक्कों को रोकने के लिए सीमा पर लगा रखा था. मैंने लड़कों (टीम के
साथियों) से कहा, ”बालकनी में आओ और इसे देखो क्योंकि
जीवन में तुमने कभी ऐसी पारी नहीं देखी होगी.“ मैं
फिर कहना चाहूंगा मैंने अपने जीवन में उससे बढ़िया कोई पारी नहीं देखी.
रे
मा.: ..और आपने अपनी किताब में कहा है, जब
वह वापिस लौटा तो आपने उससे हाथ मिलाते हुए कहा, ”काश! मैं इस तरह खेल पाता!“
ब्रैडमैन:
हां, मैंने यही कहा था.मेरी इच्छा थी कि कभी
मैं ऐसी पारी खेलता.
रे
मा.: आपने जब 334 रन बनाये जोकि तब विश्व रिकार्ड था (और बैट को खूंटी में टांग
दिया)...लेकिन अपनी उस पारी को कभी सर्वोत्तम पारी नहीं कहा?
ब्रैडमैन:
तकनीकी रूप से यह बहुत अच्छी पारी नहीं थी, क्योंकि
मैंने इसमें तमाम गलतियां की थीं।
रे
मा.: (हंसते हुए) ये गलतियां क्या थीं?
ब्रैडमैन:
अगर आप गेंद को कवर की दिशा में मारने की कोशिश करें और वह थर्डमैन की तरफ चली
जाये तो यह खामी है. क्योंकि गेंद वहां नहीं गयी जहां आप उसे भेजना चाहते थे।
रे
मा.: लेकिन यह भी तो देखिए कि आपने 100 रन लंच के पहले और 200 रन चाय के पहले और
दिन का खेल खत्म होने के पहले 309 रन बनाये थे.
ब्रैडमैन:
हां, मैं जानता हूं कि अंततः नतीजा ही मायने
रखता है.लेकिन मैंने इससे अच्छी पारी सन 1930 में लार्ड्स में खेली थी जब मैंने
254 रन बनाये थे. वहां मैंने जो गेंद जहां मारी थी, वह वहीं गयी थी, सिवाय उस गेंद के जिस पर मैं आउट हो गया था.
रे
मा.: आप कभी विरले ही विकेट के पीछे कैच होते थे? (काट बिहाइंड) ऐसा क्यों था कि आप
विकेटकीपर के द्वारा कभी-कभार ही कैच होते थे, जबकि आजकल खिलाड़ी सबसे ज्यादा कीपर
द्वारा ही कैच किए जाते हैं?
ब्रैडमैन:
मुझे लगता है कि इसकी वजह यह थी कि मेरे खेलने की तकनीक आज के खिलाड़ियों से भिन्न
थी. याद रखिए मैंने आपसे पहले ही कहा है कि मेरा कोई कोच नहीं था.मुझे किसी ने कुछ
सिखाया नहीं था. मैंने, अपनी निजी तकनीक विकसित की थी. आप लोग
जिसे क्लोज्ड फेस तकनीक कहते हैं (खड़े हुए बैट पकड़ा और शुरू कर दिया सूतना) मतलब
यह है कि मैं सीधे बल्ले से खेलता था और बैट का मुंह उसी दिशा में खोलता था जिधर
गेंद मारनी हो. यह करते हुए मैं आफ साइड की तरफ घूम जाता था.जबकि आज के ज्यादातर
खिलाड़ी पेशेवर प्रशिक्षण ग्रहण करते हैं
और उन्हें कोच बैट का मुंह पूरी तरह से स्क्वायर रखना सिखाते हैं. ऐसे में बैट को
किसी दिशा में मोड़ने के लिए बल्ला सीधा घूमता है. उसे न केवल उस दिशा में रखना
पड़ता है बल्कि ऐसे में खिलाड़ी गेंद के ऊपर उस तरह से नहीं आ सकते जैसे कि मैं आता
था. आजकल के खिलाड़ी बल्ले को हल्का सा प्वाइंट और गली की दिशा में पहले से ही झुका
लेते हैं. इससे आमतौर पर बल्ले का किनारा ज्यादा खुल जाता है. जबकि मैं बल्ला इतना
नहीं खोलता था. इसके अलावा मैं इस बात को भी समझता हूं कि आजकल के खिलाड़ी बहुत
भारी बल्ले का इस्तेमाल करते हैं.आप भारी बल्ले से होरीजेंटल (जमीनी) शॉट नहीं खेल
सकते. मैं समझता हूं कि यह चीज (अगर मैं अपना मुहावरा इस्तेमाल करूं) उन्हें आलसी
बनाती है. विशेषकर उनके रक्षात्मक मामले में.
रे
मा.: (किताब उठाकर चित्र की तरफ इशारा करते हुए जिसमें ब्रैडमैन ड्राइव कर रहे हैं)
लेकिन आपकी जो यह शैली है,
वह लगभग गोल्फ शॉट की तरह है ?
ब्रैडमैन:
हां, अंतिम तौरपर यह बिल्कुल गोल्फ शॉट के
सरीखी ही है.
रे
मा.: इसे हम आज के किसी महान बल्लेबाज में क्यों नहीं देखते?
ब्रैडमैन:
मुझे लगता है, इसकी वजह कोच हैं. कोच खिलाड़ियों की
बाईं कलाई, बैट के हैंडिल में सामने रखवाते हैं और
बैट के किनारे (धार को) की लंबवत (परपेंडीकुलर) रखने पर जोर देते हैं.
रे
मा.: लेकिन ऐसे खिलाड़ी दुनिया के बहुत अच्छे खिलाड़ी हैं?
ब्रैडमैन:
निस्संदेह. दरअसल हम लोग जिस एक चीज पर बात कर रहे हैं वह एक भिन्न तकनीक है.
रे
मा.: तो, आज की रात (यह इंटरव्यू आस्ट्रेलियन
टीवी में उसी रात प्रसारित होना था-अनुवादक) सर डोनाल्ड ब्रैडमैन इन खिलाड़ियों को
मुफ्त में आप क्या सलाह देंगे?
ब्रैडमैन:
निश्चित रूप से मैं उनसे कहना चाहूंगा कि वे अपने लिए हल्के बल्ले खरीदें। तीन
पाउंड का बैट बहुत भारी बैट है.यह क्लाइव लायड के लिए तो ठीक है जो व्यक्तिगत रूप
से बहुत ताकतवर और लंबे-चैड़े थे. लेकिन जहां तक आजकल के आम खिलाड़ियों की बात है, तो मैं नहीं समझता कि उन्हें 2 पौंड 6
औंस या 7 औंस से भारी बल्ला ठीक होगा.
रे
मा.: ठीक है...और उन्हें इन बल्लों की जरूरत है जो आपके सिर के पीछे हैं (तस्वीर
की तरफ इशारा करते हुए)
ब्रैडमैन:
(तस्वीर पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए) इस स्थिति के लिए आपको भिन्न शैली का कोच
रखना होगा. एक भिन्न तकनीक अपनानी होगी.
रे
मा.: तीस के दशक में आप कभी इंग्लैंड क्यों नहीं गये ताकि प्रोफेशनल बन सकते?
ब्रैडमैन:
क्योंकि मैंने कभी प्रोफेशनल बनना ही नहीं चाहा। (एक कठोर प्रोफेशनल) मैंने
क्रिकेट खेली क्योंकि मैं क्रिकेट से प्यार करता था। मैंने इसे पेशे के बतौर नहीं
खेला. मेरा मानना है कि अगर मैं प्रोफेशनल बन गया होता तो मैं खेल का मजा खो देता.
रे मा.:
आपके पास वह कौन सी दिशा (लाइन) थी जिसके चलते आप अपने काम में क्रिकेट का किसी
तरह का हस्तक्षेप नहीं चाहते थे?
ब्रैडमैन:
इसे आप चाहे जिस तरह समझें,
पर मैं हमेशा एक ऐसा काम करना चाहता था
कि जिसका क्रिकेट से किसी तरह का जुड़ाव न हो. जिसका क्रिकेट से कुछ लेनादेना न हो.
लेकिन जब मैंने काम तलाशना शुरू किया तो मुझे जो भी काम मिला उसमें क्रिकेट किसी न
किसी तरह जुड़ा था. अखबारों और रेडियो में मुझे काम मिला जो क्रिकेट से संबंधित थे.
मैंने ये काम किए तो लेकिन शीघ्र ही अवसाद से घिर गया. इस वजह से छोड़ना पड़ा. इसके
बाद मैंने तब तक इंतजार किया जब तक कि ऐसा काम नहीं मिल गया जिसका क्रिकेट से कोई
दूर-दूर तक का रिश्ता न हो. यही वजह है कि मैं यहां (दक्षिण आस्ट्रेलिया) शेयर
दलाली करने आया हूं.
रे
मा.: लेकिन एक ऐसा समय भी आया, जब
आपने इंग्लैंड जाकर लंकाशायर लीग की तरफ से खेलने का मन बनाया, तब इसके लिए अवसर था?
ब्रैडमैन:
सिर्फ इसलिए क्योंकि उस समय, मैं
कहीं भी काम हासिल करना चाहता था.
रे
मा.: कई मौकों पर ऐसा भी देखा गया है जब आपने लापरवाही भरा शॉट खेला है?
ब्रैडमैन:
हां, कभी-कभी मैंने लापरवाही भरे शॉट खेले
हैं और इनकी कीमत भी चुकाई है. लेकिन जब कोई गेंदबाज गेंद लेकर आ रहा होता है तो
मैंने कभी यह नहीं सोचा कि अगर इसने खराब गेंद डाली तो उस पर रन बनाऊंगा, मेरी सोच
हमेशा इससे भिन्न रही है.मेरी सोच यह होती थी कि मैं इस गेंद पर रन बनाने की कोशिश
करूंगा. अगर मेरे लिये यह संभव हुआ तो यही कारण है कि मैंने गेंदबाज की गेंद को
सिर्फ गेंद समझा. एक बार गेंदबाज के हाथ से छूट गयी तो वह सिर्फ बॉल है, मैं उससे रन आउट भी हो सकता हूं और रन
भी बना सकता हूं. लेकिन मेरे लिए हर गेंद का एक जैसा महत्व होता था. इसलिए मैंने
कई बार अच्छी गेंदों पर लापरवाही भरे शॉट मारे हैं और रन भी बनाये हैं.दरअसल, आपका मानसिक नजरिया बहुत महत्वपूर्ण
होता है. आपको सिर्फ यही सोचना चाहिए कि मैं इस गेंद पर रन बनाने जा रहा हूं. अगर
मेरे लिए ऐसा कर पाना संभव हआ.
रे
मा.: अब सर डोनाल्ड, हम उस बात पर आते हैं जिसमें कहा गया
था कि बॉडीलाइन आपकी दुर्बलता थी?
ब्रैडमैन:
क्या सचमुच थी? (वह हंसते हैं)
रे
मा.: कहा जाता है कि आपको बांधकर रख दिया गया था; क्योंकि आपको बांधकर रखना ही
उनका लक्ष्य था?
ब्रैडमैन:
इतिहास खुद इसका फैसला करेगा कि ऐसा नहीं था.
रे
मा.: आपने अपनी किताब में कहा है कि यदि आप बॉडी लाइन बोंलिंग का सामना नहीं करते
तो इसके खतरे को कभी नहीं जान पाते। कृपया मुझे खतरे के बारे में बताइये?
ब्रैडमैन:
आपको एक छोटी मिसाइल का सामना करना होता था जो कि 156 से 168 ग्राम वजन की क्रिकेट
की गेंद के रूप में थी. यह मिसाइल 80 से 90 मील प्रति घंटे की रफ्तार से आपकी तरफ
आती थी और जब यह गेंदबाज के हाथ से छूटती और आप तक पहुंचती थी. उस सबमें महज एक
सेकेंड का सातवां हिस्सा लेती थी। सेकेंड के इसी सातवें हिसे में आपको गेंद की
लाइन में आना होता था। यह देखना होता था कि पिच में गेंद कहां टप्पा खा रही है या
बाउंस हो रही है (क्योंकि बाउंस अक्सर फेंके जाते थे) इस तरह गेंद यदि कुछ निश्चित
जगहों में गिरती थी तो छाती तक नहीं, तो
सिर तक उछाल लेती थी. इस तरह, उसी
अल्प समय में आपको यह तय करना पड़ता था कि रन बनाना है या कोशिश करते हुए वापसी का
रास्ता बनाना है या उस गेंद को छोड़ना है, उस
गेंद पर रक्षात्मक शॉट खेलना है या कोशिश करते हुए वापसी का रास्ता नापना है. अगर
आप इस सब पर किसी डाक्टर से पूछें कि सेकेंड के सातवें हिस्से में आप क्या कर सकने
में सक्षम हैं तो उसके लिए यह बहुत ही कठिन सवाल होगा. खिलाड़ियों के लिए यह वास्तव
में बहुत खतरनाक इसलिए भी था; क्योंकि उन दिनों उनके सिर में माइकलीन टायर जैसी
कुछ चीज नहीं थी. उनके पास वही पुरानी फैशन के रक्षा कवच होते थे, न कि हेलमेट. ऐसे में यह सब कुछ बहुत
खतरनाक था.
रे
मा.: आप कभी कभार किस तरह के छाती कवच इस्तेमाल में लाते थे?
ब्रैडमैन:
मैं छाती में चारों तरफ रबर का एक सुरक्षा कवच बांधता था (पसलियों के पास इशारा
करते हुए) और एक थाई पैड.बस इतना ही था, इससे
ज्यादा कुछ नहीं।
रे
मा.: क्या आप सोचते थे कि ऐसे में कोई भी मर सकता था?
ब्रैडमैन:
अरे नहीं. मैं नहीं समझता कि मैंने कभी यहां तक सोचा हो कि इससे कोई मर भी सकता था.
लेकिन ऐसा मैं निस्संदेह समझता था कि इससे कोई खिलाड़ी गंभीर रूप से घायल हो सकता
था और तमाम बार खिलाड़ी ऐसी चोट से सिर्फ बाल बराबर दूरी से बचे थे.
रे
मा.: लेकिन इस तरह की आशंका आपने 1930 के इंग्लैंड दौरे पर जतायी थी, क्या इसकी
वजह भारी प्रचार नहीं था?
ब्रैडमैन:
हां, मुझे पहले से ही आशंका थी कि इस बार
रफ्तार पर जोर दिया जा सकता है. शार्ट पिच गेंदें की जा सकती हैं.लेकिन असली सवाल
लेग साइड की फील्ड का था, जहां पर खिलाड़ी खड़ा किया गया था. इसकी अपेक्षा नहीं थी. हालांकि
क्रिकेट के नियमों के तहत इसमें प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता था. मगर यह खेल की
आत्मा के विरुद्ध था. बिली वुडफुल ने इसकी शुरू से ही शिकायत की थी.
रे
मा.: तब वुडफुल ने यहां शानदार प्रदर्शन किया था. एडिलेड और ओवल में, वह कप्तान था और शीघ्र ही पुरानी लय
में आ गया था. हालांकि इसकी कल्पना करना थोड़ा दुष्कर है;लेकिन हम लोगों ने पढ़ा है
कि तब सशस्त्र पुलिस बल लगाये गये थे. क्या दंगे की आशंका थी...क्या बात यहां तक
पहुंच गयी थी?
ब्रैडमैन:
हम लोग गंभीरता से सोच रहे थे कि वहां दंगा किसी भी पल हो सकता था. क्योंकि
खिलाड़ियों के चोटिल होने की आशंका थी.भीड़ बहुत तनाव में थी.
रे
मा.: कहते हैं आस्ट्रेलियाई कप्तान के ड्रेसिंग रूम में इंग्लैंड के मैनेजर से कहा
था कि यहां दो टीमें हैं और उनमें एक ही क्रिकेट खेल रही है?
ब्रैडमैन:
मैंने भी इस बारे में सुना था.लेकिन देखने वाली बात यह है कि उस समय ड्रेसिंग रूम
में वह अकेले व्यक्ति थे जहां तक मुझे पता है...
रे
मा.: लेकिन यह बात प्रेस को लीक हो गयी?
ब्रैडमैन:
हां, यह बात प्रेस को लीक हो गयी.मैं नहीं
जानता यह किसके द्वारा हुई. इसके लिए मुझ पर आरोप लगा था. लेकिन वह व्यक्ति सचमुच
मैं नहीं था.
रे
मा.: अच्छा .लेकिन क्या आप समझते हैं ऐसा था? क्या
आप महसूस कर रहे थे कि केवल एक टीक ही क्रिकेट खेल रही थी?
ब्रैडमैन:
इसे आप यूं समझिए कि हम एक बिल्कुल भिन्न तरह का क्रिकेट खेल रहे थे.
रे
मा.: कहते हैं गब्बी एलेन तब आपका अच्छा दोस्त था तथा इंग्लैंड की टीम में और भी
बहुत खिलाड़ी आपके अच्छे दोस्त थे?
ब्रैडमैन:
गब्बी एलेन ने इसका (बॉडी लाइन रणनीति) विरोध किया था.डगलस जार्डिन ने उससे भी
शरीर को निशाना बनाकर गेंदबाजी करने के लिए कहा था. लेकिन उसने ऐसा करने से इंकार
कर दिया था. उसने डगलस से साफ-साफ कह दिया था कि मैं इस तरह की शॉट गेंदबाजी नहीं
करूंगा. अगर आप मुझसे सहमत न हों तो आप मुझे पहले जहाज से रवाना कर दीजिए. मैं
सबसे पहले मेलबोर्न क्रिकेट क्लब (हेडक्वार्टर) में एलेन से इसकी शिकायत करूंगा.
जार्डन ने फिर उससे कभी इस बारे में कुछ नहीं कहा.
रे
मा.: कहीं लारवुड ने कहा था कि उन्होंने आपको 1930 के सत्र में बंपर गेंदबाजी से
तमाम बार झिझकते और पीछे हटते देखा था और इसी वजह से उन्होंने यह रणनीति अपनाई थी?
ब्रैडमैन:
ओह हां, लेकिन यह सही नहीं है.उस खास मैच में
(जिसमें उन्होंने मुझे ऐसा करते देखा था) मैंने 200 से ऊपर रन बनाये थे. यही नहीं
मैं जिस गेंद पर आउट करार दिया गया था वह पहले मेरी बांह से टकराई थी फिर बैट से
लगी थी. इस मामले में मेरा सबसे बढ़िया जवाब यही है कि मैंने अगर उस गीले पिच में
भी 200 से ज्यादा रन बनाये थे, तो
समझा जा सकता है कि मैं कितना हिचकिचाया और पीछे हटा होऊंगा.
रे
मा.: और रिर्पोटिंग के मुताबिक भी आप और आर्ची जैक्सन गेंदबाजी को झेलते हुए बुरी
तरह चोटिल हो गये थे, क्योंकि तमाम गेंदें आपको अपने शरीर में झेलनी पड़ी थीं ?
ब्रैडमैन:
हां, ऐसा था. अगर उस दिन के आप अखबारों को
देखें और तस्वीरों को देखें तो पता चलेगा कि विशेष रूप से आर्ची जैक्सन बुरी तरह
से चोटिल हुआ था.
रे
मा.: तो इस पर आपने डगलस जार्डिन से क्या कहा?
ब्रैडमैन:
कुछ नहीं. उससे कभी बात नहीं हुई.
रे
मा.: एक शब्द तक नहीं?
ब्रैडमैन:
नहीं.
रे
मा.: बाद में जब आप दोबारा एक कप के लिए गये तब भी कोई बात नहीं हुई?
ब्रैडमैन:
नहीं, कभी नहीं. जहां तक मुझे याद है कि उससे
उस दौरे के बारे में कभी एक शब्द भी बात नहीं हुई.
रे
मा.: ....और लारवुड से?
ब्रैडमैन:
नहीं. मैंने हेरोल्ड के अलावा कभी किसी से कोई बात नहीं की. आजकल जैसा खिलाड़ी
आमतौर पर करते हैं, उन दिनों हम ड्रेसिंग रूम में इस तरह भाईचारे का व्यवहार नहीं
करते थे. उन दिनों खिलाड़ियों के बीच किसी तरह की अंतरंगता या भाईचारा नहीं था.
रे
मा.: ऐसा क्यों था? क्या इसकी वजह उन दिनों खिलाड़ियों में
कटुता का होना था?
ब्रैडमैन:
(सिर हिलाते हैं)
रे
मा.: क्या आप दांवपेंच के जरिए किसी को परास्त करने से घृणा करते हैं?
ब्रैडमैन:
देखिए घृणा जैसा शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है. इसलिए मैं ऐसा नहीं कहूंगा जैसा
कि आप कहते हैं. लेकिन निस्संदेह मैं इस चीज को पसंद नहीं करता.
रे
मा.: आपने यह बात पढ़ी है जिसमें जार्डिन ने कहा है कि इस दांवपेंच से डॉन ब्रैडमैन
पर आसानी से अंकुश लग गया?
ब्रैडमैन:
ऐसा करके उसने निस्संदेह सब पर अंकुश लगा दिया.
रे
मा.: सर डोलाल्ड आजकल के क्रिकेट में कुछ आधुनिक खिलाड़ी तमाम तरह की हरकतें करते
हैं. क्या आपने भी कभी आउट होने के समय ऐसा कुछ महसूस किया?
ब्रैडमैन:
मैंने भी कई मर्तबा ऐसा महसूस किया. लेकिन निस्संदेह मैंने कभी कुछ ऐसा नहीं किया.
रे
मा.: आपको आखिर किस चीज ने रोका?
ब्रैडमैन:
मेरे साथ ऐसा सिर्फ एक बार हुआ जब 1947-48 में भारतीयों के आस्ट्रेलिया दौरे के
समय मुझे बिठा दिया गया.
रे
मा.: लेकिन वह तो महज एक संयोग था?
ब्रैडमैन:
हां, वह महज एक संयोग था. एक दुर्घटना थी और
मैं बाहर हो गया लेकिन निश्चित रूप से यह मानसिक नियंत्रण का सवाल था. हर आदमी निराश
होता है जब वह बाहर होता है. ऐसा खिलाड़ी कोई मामूली सी बेवकूफी करता है और बाहर हो
जाता है. तब वह अपने विकेट गिरने का अफसोस करता है. लेकिन उसे अपने आप पर नियंत्रण
रखना होता है.
रे
मा.: क्या लारवुड आपके द्वारा देखा गया अब तक का सबसे तेज गेंदबाज है?
ब्रैडमैन:
नहीं, वह नहीं था. अपने अच्छे दिनों में वह
बहुत अच्छा गेंदबाज था. बहुत तेज रफ्तार भी था. लेकिन अपने जीवन में मैंने जो सबसे
तेज गेंदबाज देखा है, वह फ्रैंक टाइसन था. हालांकि वह उतना खतरनाक गेंदबाज नहीं था,
जितना कि हेरोल्ड था. लेकिन वह निर्विवाद रूप से तेज था.
रे
मा.: आपके हिसाब से सबसे अच्छा तेज गेंदबाज कौन हुआ?
ब्रैडमैन:
मैं किसी एक का नाम नहीं लूंगा. मगर मेरे हिसाब से शायद डेनिस लिली ऐसा था.
हालांकि कई दूसरे गेंदबाज भी उसी रफ्तार के थे मगर डेनिस का रिकार्ड सर्वोत्कृष्ट
था.
रे
मा.: अब मैं आपसे सबसे अच्छे बल्लेबाज के बारे में पूछने जा रहा हूं.
ब्रैडमैन:
मैं किसी बल्लेबाज का नाम नहीं लूंगा कयोंकि बहुत सारे बल्लेबाज हैं जो एक जैसे
प्रतिभाशाली हैं। अगर आप मुझसे पूछते हैं कि इसमें से अच्छा कौन था तो मैं इस सूची
को शुरू करते हुए कहूंगा जार्ज हेडली, एबर्टन
वीक्स, बैरी रिचर्ड्स, ग्रेमी पोलाक, वैली हेमंड, सर जैक हाब्स, सर लेन हटन, डेनिस काम्पटन...आमतौर पर ये सभी एक
जैसी प्रतिभा वाले हैं. इनमें से सबसे बढ़िया आप छांटना नहीं पसंद करेंगे. हां, अगर आप मुझसे पूछते हैं कि इनमें से
सबसे बढ़िया क्रिकेटर कौन था, मेरा
मतलब सबसे बढ़िया आलराउंडर कौन था तो मैं एक ही नाम लूंगा सर गैरी सोबर्स. मैं
समझता हूं कि वह मेरी नजरों में बस एक प्रश्नहीन क्रिकेटर है. एक ऐसा क्रिकेटर
जिसके खेल में किसी तरह की कमी नहीं निकाली जा सकती. एक त्रुटिहीन क्रिकेटर.
रे
मा.: क्या आपको नये खिलाड़ियों में ऐसा नहीं दिखता जिसको नये ब्रैडमैन का तमगा दिया
जा सके?
ब्रैडमैन:
निस्संदेह ऐसा ही है. नोर्मन ओनील जो कि न्यू साउथ वेल्स की तरफ से खेलने आया था, ऐसा पहला खिलाड़ी हो सकता था. नोर्मल
बहुत अच्छा बल्लेबाज था. लेकिन मैं समझता हूं कि अगर वह गायब हो गया तो इस कारण
क्योंकि वह बहुत जल्दी आक्रामक हो जाता था.
रे
मा.: ब्रायन लारा कितना अच्छा है?
ब्रैडमैन:
ब्रायन लारा और तेंदुलकर आज दुनिया के दो सबसे अच्छे बल्लेबाज हैं और सचमुच यह
जानना बहुत कठिन है कि दोनों में बेहतर कौन है? तेंदुलकर
बहुत ही कसाव वाले बल्लेबाज हैं उसका बचाव बहुत ही मजबूत है. लारा संभवतः थोड़ा
ज्यादा आक्रामक है. वह तेंदुलकर से ज्यादा खतरे मोल लेता है लेकिन दिन के अंत में
उसके खाते में बहुत रन जुड़ चुके होते हैं. कुछ आस्ट्रेलियाई बहुत बढ़िया कर रहे हैं.
स्टीव वा और मार्क वा दोनों असाधारण हैं उन दोनों में इतना कम अंतर है कि यह कहना
बहुत कठिन है कि दोनों में बेहतर कौन है.
रे
मा.: आपने मुझसे तेंदुलकर की कहानी बतायी थी कि आपने कैसे जेसी (आपकी पत्नी) से
पूछा था...?
ब्रैडमैन:
मैंने तेंदुलकर को सिर्फ टेलीविजन में देखा था (यह इंटरव्यू लेने तक की बात है बाद
में यानी इस इंटरव्यू के एक सप्ताह बाद ही अपने 90वें जन्मदिवस पर सर डोनाल्ड
ब्रैडमैन तेंदुलकर से मिले थे) उससे कभी मुलाकात नहीं की थी। क्योंकि वह कभी आस्ट्रेलिया
नहीं आया (शायद सर डोनाल्ड भूल गये होंगे क्योंकि तेंदुलकर 1991 में आस्ट्रेलिया
के दौरे में जा चुके थे-लोकमित्र) लेकिन उसे मैंने एक दिवसीय मैच खेलते हुए टीवी
पर देखा है. मैं उसके खेलने की तकनीक से बहुत-बहुत प्रभावित हुआ. इसलिए मैंने अपनी
पत्नी से कहा कि वह आये और उसका खेल देखे. चूंकि मैंने कभी खुद को खेलते नहीं देखा.
लेकिन मैंने महसूस किया कि वह भी वैसा ही खेलता है जैसा कि आमतौर पर मैं खेला करता
था. मेरी पत्नी ने उसे देखा और कहां, ‘हां’ ऐसा ही है. तुम दोनों में समानता है.
रे
मा.: लेकिन क्या आपकी पत्नी ने आपको खेलते देखा है?
ब्रैडमैन:
हां, उसने देखा है. इसलिए मैंने उसे
तेंदुलकर को देखने के लिए कहा था.
रे
मा.: सर डोनाल्ड ब्रैडमैन,
क्या यह आपके लिए फख्र की बात है?
ब्रैडमैन:
मैं नहीं जानता. इसे मैं विस्तार से व्याख्यायित नहीं कर सकता. मेरे लिए उसकी यह पूर्णता, उसकी तकनीक, उसके स्ट्रोक सब मेरे जैसे थे, कम से कम मैं ऐसा ही महसूस कर रहा था.
रे
मा: ......और शेन वार्न के बारे में आपकी क्या राय है?
ब्रैडमैन:
सबसे पहले तो मैं यह कहना चाहूंगा कि वह (स्पिन) क्रिकेट में सालोंसाल से होने
वाली सबसे अच्छी चीज है. क्रिकेट दरअसल मूलतः बल्लेबाज और तीसरी अंगुली वाले महान
लेग स्पिनर का खेल है. इन्हीं दो के बीच सर्वोत्तम क्रिकेट देख पाना संभव है.
हमारे जमाने में चार महाने लगे स्पिनर थे. उनमें से पहले डा. एच वी होर्डन थे, जो उस समय खेला करते थे, जब शायद आपने जन्म भी न लिया हो. दूसरे
अर्थर मेले थे, तीसरे थे क्लैरी ग्रिमेट और चौथे थे
हैं शेन वार्न . अगर इनका खेल रिकार्ड देखें तो हम समझ सकते हैं कि ये कितने
चमत्कारिक गेंदबाज थे. मेले का स्ट्राइक रेट इस सबमें अच्छा था. वह कुछ ही ओवरों
में विकेट ले लिया करते थे. टेस्ट क्रिकेट में विकेट निकालने का उनका औसत हर
सातवें ओवर में है. होर्डन का औसत लगभग 9 ओवर प्रति विकेट था. जबकि ग्रिमेट का औसत
था 12 ओवर प्रति विकेट, शेन वार्न का भी इस समय यही औसत है.
मैं समझाता हूं कि शेन वार्न अपने दौर का सबसे बढ़िया लेग स्पिनर है. जहां तक
इतिहास में उसकी जगह की बात है तो मैं समझता हूं कि उसकी जगह बढ़िया से भी बेहतर है.
रे
मा.: आप अपने क्रिकेट जीवन की किस याद को दुहराना चाहेंगे?
ब्रैडमैन:
अगर मैं इसे एक शब्द में कहूं तो ‘संपूर्णता’ (इंटेग्रिटी) को.
रे
मा.: मैं समझता हूं कि शायद हम आपको यह संपूर्णता प्रदान करेंगे।
ब्रैडमैन:
धन्यवाद...
रे
मा.: क्या और भी कोई बात है जो आप कहना चाहते हैं?
ब्रैडमैन:
आपने शुरू में मुझसे यह पूछा था और मैंने आपसे कहा था कि कुछ चीजें हैं, जिन्हें मैं कहना चाहता हूं लेकिन मुझे
अपनी याद्दाश्त पर भरोसा नहीं था. इसलिए इन्हें मैंने कागज के एक टुकड़े में लिख
लिया है. आप कहें तो इन्हें मैं पढ़कर सुना दूं.
रे
मा.: प्लीज.
ब्रैडमैन:
यह एक वक्तव्य है जो कि लार्ड हैरिस ने दिया था. बुढ़ापे के दिनों में कुछ लोगों ने
उसका क्रिकेट के महान राजदूत होने के नाते सम्मान किया था. उसकी मृत्यु 1932 में
हो गयी थी. वह केंट का कप्तान हुआ करता था. वह बंबई का गवर्नर भी बना. उसी ने भारत
में क्रिकेट का प्रचार और भरपूर प्रोत्साहन दिया. उसी हैरिस द्वारा अपने 90वें
जन्मदिन पर दिये गये वक्तव्य को मैं पढ़कर सुनाने जा रहा हूं. यह इस प्रकार है-
”आपको क्रिकेट से प्यार इसलिए करना
चाहिए क्योंकि यह किसी भी घृणित चीज से मुक्त है. दुनिया के किसी भी खेल की, किसी भी असम्मानीय चीज से मुक्त है.
इसे उत्सुकता से खेलना, भरपूरता से खेलना और आत्मत्याग की
भावना से खेलना, अपने आप में नैतिकता का एक सबक है. हवा
और धूप में इसे खेलना ईश्वर की एक कक्षा में शामिल होना है. मेरे भाईयों, इसे प्रोत्साहित करो, ताकि वे सब इसकी ओर आकर्षित हों, जिनके
पास इसके खेलने का समय हो. इसे हर चीज से बचाओ जो इसे कलंकित करे ताकि इसका सभी
लोगों के लिए विकास हो सके.“...यही
मेरा भी सिद्धांत है. मैं भी इसे प्रत्येक व्यक्ति को सौंपना चाहता हूं.
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